Sunday, August 23, 2009

कुछ टुकड़े

यादों की आलमारी में संजोया था बीता हुआ कल
रखे थे उनमे कुछ ख़ुशी तो कुछ दर्द से भरे पल
अब बस पुरानी लकडी के कुछ टुकड़े बचे है वहां

क्या सोचा, कब मिले, क्या बातें हुई थी
कितने आंसू थे, या फिर कितनी ख़ुशी थी
ब्यौरा इसका अब तो मुश्किल है करना बयाँ
अब बस पुरानी लकडी के कुछ टुकड़े बचे है वहां

हर वो पल जो बीता था तुम्हारे साथ
कभी हकीकत तो कभी थी ख्यालो की बात
देर रात का सपना सा लगता है अब वो जहाँ
अब बस पुरानी लकडी के कुछ टुकड़े बचे है वहां

सांसों की संदली महक, स्पर्श का स्नेहिल एहसास
था जो शायद कभी मुझे मेरे जीवन से भी ख़ास
और अब खाली विचारो से ज्यादा नहीं रहा वो समां
अब बस पुरानी लकडी के कुछ टुकड़े बचे है वहां

तुम्हारे जाने से, महसूस तो किया था कुछ बुरा सा
एहसास जिसमे दर्द ज्यादा था या फिर गुस्सा ज़रा सा
हिसाब करना इसका थोडा नामुमकिन सा लगता है यहाँ
अब बस पुरानी लकडी के कुछ टुकड़े बचे है वहां

kuch tukde
yadon ki aalmaari mein sanjoya tha beeta hua kal
rakhe the kuch khushi to kuch dard se bhare pal
ab bas poorani lakdi ke kuch tukde bache hai wahan

kya socha, kab mile, kya batein hui thi
kitne aansu the, yaa phir kitni khushi thi
byora iska ab to jara mushkil hai karna byan
ab bas kuch poorani lakdi ke tukde bache hai wahan

har woh pal jo beeta tha tumhare saath
kabhi haqeeqat to kabhi thi khyalo ki baat
der raat ka sapna sa lagta hai ab woh jahan
ab bas kuch poorani lakdi ke tukde bache hai wahan

sanson ki sandali mahak, sparsh ka snehil ehsaas
tha jo shayad kabhi mujhe mere jeevan se bhi khaas
aur ab khaali vicharo se jyada nahi raha woh sama
ab bas kuch poorani lakdi ke tukde bache hai wahan

tumhare jaane se, mahsus to kiya tha kuch bura sa
ehsas jisme dard jyada tha yaa phir gussa zara sa
hisab karna iska thoda namumkin sa lagta hai yaha
ab bas kuch poorani lakdi ke tukde bache hai wahan

12 comments:

अर्चना तिवारी said...

बेहद खूबसूरत रचना ...

Rajat Narula said...

तुम्हारे जाने से, महसूस तो किया था कुछ बुरा सा
एहसास जिसमे दर्द ज्यादा था या फिर गुस्सा ज़रा सा
हिसाब करना इसका थोडा नामुमकिन सा लगता है यहाँ
अब बस पुरानी लकडी के कुछ टुकड़े बचे है वहां


Its just brilliant, simple and heart worming... really nice...

रवि कुमार, रावतभाटा said...

बढ़िया है मेरे भाई...

चंदन कुमार झा said...

बहुत सुन्दर.

चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.......भविष्य के लिये ढेर सारी शुभकामनायें.

गुलमोहर का फूल

संदीप said...

हौसला अफजाई के लिए धन्यवाद मित्रो

विपिन बिहारी गोयल said...

बहुत अच्छे

AlbelaKhatri.com said...

good !

shama said...

Waah..ek 'sandali, mahktai huee rachna !'

http://shamasansmaran.blogspot.com

http://kavitasbyshama.blogspot.com

http://aajtakyahantak-thelightbyalonelypath.blogspot.com

রিরেকানন্দ ঝা (विवेकानंद झा) said...

खूब अच्छा लिखते हॊ संदीप
इसमे और सुधार हॊ
कामना !

संदीप said...

dhanyavaad mitro :)

Harkirat Haqeer said...

यादों की आलमारी में संजोया था बीता हुआ कल
रखे थे उनमे कुछ ख़ुशी तो कुछ दर्द से भरे पल
अब बस पुरानी लकडी के कुछ टुकड़े बचे है वहां

बहुत खूब .....संदीप जी बहुत अच्छी लगी आपकी रचना ....!!

Anand said...

Jitni taarif ki jaaye kam hai, aap jaisey ubhertey hue kaviyo ki aaj hamein atyant avashaykta hai. Aapko meri shub kaamnaaye.